✍️ लिखा गया:शीतलाप्रसाद
वसंत पंचमी भारत के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक त्योहारों में से एक है। यह पर्व विशेष रूप से विद्या, बुद्धि, कला और संगीत की देवी माँ सरस्वती को समर्पित होता है। इस दिन देशभर में सरस्वती पूजा का आयोजन बड़े श्रद्धा‑भाव से किया जाता है। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि भारतीय संस्कृति, शिक्षा और ऋतु परिवर्तन का भी प्रतीक है।
वसंत पंचमी का महत्व
वसंत पंचमी माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन से वसंत ऋतु का आगमन माना जाता है, जब प्रकृति में नई ऊर्जा, हरियाली और उल्लास दिखाई देता है। खेतों में सरसों के पीले फूल खिल उठते हैं और चारों ओर उत्सव जैसा माहौल बन जाता है।
यह दिन विद्यार्थियों, शिक्षकों, कलाकारों और संगीत प्रेमियों के लिए विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि इस दिन माँ सरस्वती की आराधना करने से ज्ञान, बुद्धि और वाणी में शुद्धता आती है।
सरस्वती पूजा का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, माँ सरस्वती को ब्रह्मा जी की मानस पुत्री माना गया है। वे ज्ञान, विद्या, संगीत, कला और बुद्धि की देवी हैं। वसंत पंचमी के दिन उनका प्रकटोत्सव माना जाता है, इसलिए इस दिन सरस्वती पूजा की परंपरा है।
विद्यालयों, महाविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में इस दिन विशेष पूजा का आयोजन होता है। विद्यार्थी अपनी किताबें, कॉपियाँ और वाद्य यंत्र माँ के चरणों में रखकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
वसंत पंचमी का इतिहास
पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि की रचना के समय जब ब्रह्मा जी ने मनुष्यों को बनाया, तब पृथ्वी पर मौन और नीरसता थी। तब ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे माँ सरस्वती प्रकट हुईं और उनके वीणा वादन से संसार में ज्ञान, वाणी और संगीत का संचार हुआ। यही दिन वसंत पंचमी के रूप में जाना गया।
एक अन्य मान्यता के अनुसार, इस दिन से देवी सरस्वती की पूजा का आरंभ हुआ, जो आगे चलकर पूरे भारत में परंपरा बन गई।
वसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है?
वसंत पंचमी मनाने के पीछे कई कारण हैं:
- ज्ञान और विद्या की देवी माँ सरस्वती की आराधना के लिए
- वसंत ऋतु के स्वागत और प्रकृति के नवजीवन का उत्सव मनाने के लिए
- विद्यार्थियों में शिक्षा और संस्कार के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए
- कृषि कार्यों में नई शुरुआत के प्रतीक के रूप में
वसंत पंचमी पर पीले रंग का महत्व
इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व होता है। लोग पीले वस्त्र पहनते हैं और पीले रंग के व्यंजन जैसे केसरिया खीर, बूंदी और हलवा बनाते हैं। पीला रंग ऊर्जा, सकारात्मकता, ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
निष्कर्ष
वसंत पंचमी और सरस्वती पूजा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कृति और प्रकृति से जुड़ाव का उत्सव है। यह दिन हमें शिक्षा के महत्व, सृजनशीलता और सकारात्मक सोच का संदेश देता है। इस पावन अवसर पर माँ सरस्वती की कृपा से जीवन में विद्या, विवेक और वैभव की प्राप्ति हो — यही कामना की जाती है।
उपेक्षाबर (Upekhabar) के पाठकों को वसंत पंचमी और सरस्वती पूजा की हार्दिक शुभकामनाएँ।

